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अनकहा प्यार (कविता)
January 28, 2019 • प्रगति गुप्ता,

अनकहा प्यार

जुटने लगी है

अनगिनत यादों की डोर

दिन-ब-दिन-

मेरे आस-पास

तुझे सहेज कर रखते-रखते

और दूर जाने का

सोचूँ कैसे....

उस टूटन के डर से

औरतेरे पास आऊँ भी तो कैसे

उनमें उलझने के डर से-

उनमें उलझने के डर से....