एक उम्र होती है - कविता
July 31, 2019 • जगमोहन चोपड़ा

एक उम्र होती है

जब आपको फुसलाया नहीं जा सकता

बहलाया नहीं जा सकता

सजाया नहीं जा सकता

एक उम्र होती है

जब रोमांस जीता है आदमी

एक उम्र होती है

जब भोगता है आदमी

फिर-फिर

जब स्वाभिमानी होता है आदमी

फिर-फिर

एक उम्र होती है

जब सुख असरहीन हो जाता है

जब अच्छा बुरा

एक समझौते में चलने लगता

आदमी के साथ-साथ

एक उम्र होती है

आदमी के टूटने की

धीरे-धीरे टूटता है आदमी

सूखी लकड़ी सा

एक बच्चा बन जाता है

दंतहीन अंगहीन

एक उम्र होती है

जब आपको

फुसलाया नहीं जा सकता

बहलाया नहीं जा सकता

सजाया नहीं जा सकता