दिल का दर्पण यह आँसू - कविता
August 26, 2019 • डा. गार्गीशरण मिश्र

मुस्कानों का मौसम बीता आँसू की बरसात आ गई।

पूनम का चंदा छिप बैठा काली मावस रात आ गई।

अंधकार से अब है नाता,

कहीं उजाला दिख ना पाता।

नभ पर काली घटा छा गई,

आँखों से आँसू का तांता।

जीवन रण जीतने चला था किन्तु पराजय मात आ गई।

मधुबन के देखे थे सपने,

आतप आकर लगा दहकने।

चंदा की शीतलता खोई,

हुए पराये जो थे अपने।

मधुऋतु के मंजर के पहले पतझड़ की सौगात आ गई।

शूलों को जीवन भर ढोया,

पर मैंने संकल्प न खोया।

सभी शूल बन गये फूल अब,

हँसते आँसू से मुख धोया।

भूल गये दुःख के सब दुखड़े सुख की जब बारात आ गई।

दुःख में आँसू, सुख में आँसू,

दिल का है दर्पण यह आँसू।

आँसू है जीवन का साथी,

जीवन की गहराई आँसू।

आँसू हैं जीवन के मोती मूल्यांकन की बात आ गई।