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भूगोल
August 22, 2018 • Rashmi Ramani

इन्सान

पढ़ रहा है भूगोल

बना रहा है ख़याली नक्शे

कोरे कागजों पर

खींच रहा है बेजान लकीरें

 

पहाड़ों और नदियों की

खूबसूरती खत्म करके

कभी बारूद से उड़ा देता है

पहाड़ों का वजूद

तो

कभी अनादिकाल से

हवा के संगीत पर थिरकती नदी के बहाब को

दे देता है दुःखदायी मोड़

 

शायद भूगोल के आधार पर ही हुए हैं

देशों के विभाजन

पहाड़ों के टुकड़े

और नदी-जल के बँटवारे

अफ़सोस!

कभी किसी ने सोचा है

सब की है ये सारी धरती

हाथी से लेकर चींटी तक

हर एक को जिसकी जरूरत है।