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सरहद
August 23, 2018 • Sagar Seeyalkori

सरहद हम से क्या चाहती है।

सरहद हम से वफ़ा चाहती है।

दीवारों का होना अगर है जरूरी

सरहद सब की रजा चाहती है।

माजी को अब तो भुलाना ही होगा

सरहद ताजा हवा चाहती है।

मुश्तरका आसमानों से पूछो

सरहद कसे अदा चाहती है।

सब को सबकी खुशियाँ मुबारक

सरहद सब का भला चाहती है।

‘सतलुज, ‘रावी’, ‘व्यासा’ का पानी

सरहद ‘सागर’ मजा चाहती है।