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ग़ज़लें
September 16, 2019 • विज्ञान व्रत

हो चुका है सब

तू रचेगा अब

कुछ नहीं था तब

क्या नहीं तू अब

भूलना मुश्किल

वो अनोखी छब

है कहाँ तू अब

जानता है रब

तू मिलेगा तो

राम जाने कब

वो मेरा चेहरा न हुआ

मैं भी शर्मिंदा न हुआ

मैं उसका हिस्सा न हुआ

मुझको ये धोखा न हुआ

सब उसका सोचा न हुआ

वो मेरा रस्ता न हुआ

मैं उसकी भाषा न हुआ

तो मेरा चर्चा न हुआ

होने को क्या क्या न हुआ

मैं ही बस अपना न हुआ