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बचपन की यादें
August 17, 2020 • रोमा गुप्ता • कविताएँ


रोमा गुप्ता, लुधियाना, मो. 7837891343

वो बचपन भी कितना मज़ेदार था,
वो बचपन की यादें,
आज भी ताज़ी हैं हमारे मन में,
वो बेपरवाही,
वो ताज़गी,
वो हंसी,
वो खिलौनों से खेलना,
किसी चीज़ का ना मिलने पर रो देना,
वो नए-नए कपड़ों का खरीदना,
और छोटे भाई-बहनों को चिढाना,
वो चेहरे पर अलग सी खुशी का आना,
वो बचपन की यादें,
आज भी ताज़ी हैं हमारे मन में।

वो कुल्फी वाले का आना,
और सब बच्चों का भागना,
वो गुब्बारे वाले का आवाज़ें देना,
और सबसे बड़ा गुब्बारा ही लेना,
वो दादी का कहानी सुनाना,
और ठंडी-ठंडी ज़मीं पर ही सो जाना,
वो भाई-बहनों से छोटी-छोटी चीजों पर झगड़ना,
वो माँ के साथ रसोई मे साग का रगड़ना,
वो बचपन की यादें,
आज भी ताज़ी हैं हमारे मन में।

वो लूडो, स्टापु और कैरम का खेलना,
टीवी पर हर रोज़ प्रोग्राम का देखना,
वो सब के साथ ऊँची-ऊँची हंसना,
और नम्बर कम आने पर खुद का फसना,
वो बुआ का बचाना,
और प्यार से गोद में बिठाकर बहलाना,
वो पापा का दुकान से आने की राह देखना,
और उनके हाथ से जलेबी का लिफाफा खेंचना,
वो बचपन की यादें,
आज भी ताज़ी हैं हमारे मन में।

वो छत पर जाकर पढ़ाई करना,
और कटी पतंगों को पकड़ने की कोशिश करना,
किसी मेहमान के घर आने पर कमरे में बन्द हो जाना,
उनके जाने के बाद भर पेट रसगुल्लों और समोसों का खाना,
वो छुट्टियों में नानी के घर जाना,
और उनका नए-नए भोजन बनाना,
वो दादी-नानी का दुलार,
कहाँ मिलता है आज !
वो बचपन की यादें,
आज भी ताज़ी हैं हमारे मन में।

वो मम्मी का चोटी बनाना,
और पापा का जूते पहनाना,
फिर हमारा स्कूल को भाग जाना,
वो कक्षा में सबसे अगले बैंच पर बैठना,
और अपने दोस्तों को चिढ़ाना,
वो आधी छुट्टी में बाहर जाना,
और दोस्तों के टिफिन में से खाना,
वो दोस्तों का जन्मदिन मनाना,
और मुठ्ठी भर टॉफियों पर नज़र रखना,
वो स्कूल के फंक्शन में मम्मी पापा का आना,
और इनाम मिलने पर सबका तालियां बजाना,
यारो! ये खुशी, ये बचपन क्या मिलेगा दुबारा ?
इस जीवन को बचपन की तरह जी लो,
मस्ती में, चिंता से दूर सबसे मोहब्बत कर लो !
क्योंकि वो बचपन दोबारा ना आएगा,
गमो में डूब कर तू हमेशा ही पछताएगा,
वो बचपन की यादें,
आज भी ताज़ी हैं हमारे मन में।