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दर फिर से खुलेंगे
September 1, 2020 • डाॅ. अंजना संधीर • बिरासत

डाॅ. अंजना संधीर, Mob. 7069158973

https://www.facebook.com/SabhyaPrakashan/videos/621256185447479/

प्रिय साथिओ,

पूरा विश्व करोना के संकट से जूझ रहा है। कोई देश इसके प्रकोप से बचा नहीं है। अभी थोड़ा-थोड़ा लॉकडाउन खुला है लेकिन खतरा टला नहीं है।

आज आपके साथ एक छोटा सा वीडियो साझा कर रही हूँँ जिसमें मेरे हिंदी के तीन विदेशी छात्र हैं जो यहाँँ भारत में मेरे हिंदी के विद्यार्थी थे भारतीय भाषा संस्कृति संस्थान, गुजरात विद्यापीठ में। मैंने अपने पुराने सभी छात्रों को ईमेल और व्हाट्सएप से लॉकडाउन में संपर्क किया, उनका और उनके परिवारों का हाल जानने की कोशिश की। सभी को सुखद आश्चर्य हुआ कि उनकी हिंदी की शिक्षिका ने इतने समय बाद भी उन्हें याद किया है और संकट की घड़ी में उनका हाल पूछा है। उनके जवाब आए, मन को बहुत शांति मिली। तब विचार आया – जैसे मैं उन्हें हिंदी कविता “मछली जल की रानी है” सिखाती हूँँ और वह अपने लहजे में नर्सरी के बच्चों की तरह गाते हैं तो बहुत आनंद आता है अपनी भाषा को विदेशी जमीन में लहराते हुए देखकर। ऐसा मन में विचार आया कि संकट की घड़ी में ऐसी कोई कविता लिखुँँ जिससे वे भी अपने देश को जोड़ सकें, तब मैंने लॉकडाउन में ऐसे ही एक छोटी सी कविता लिखी – “दर फिर से खुलेंगे”। इसका अंग्रेजी अनुवाद भी मैंने किया – “Doors Will Open Again” और विदेशी छात्रों को भेज दी और कहा अगर संभव हो तो अपने देश की भाषा में भी अनुवाद करें और इसका दोनों भाषाओं में वीडियो बनाकर मुझे भेज दें।

जिसमें शुन हसेबे (Shun Hasebe) का वीडियो सबसे पहले आया जापान से हिंदी और जापानी भाषा में। उसके बाद पोलैंड से बैयता नायकर (Beata Naicker) ने भेजा हिंदी और पोलिश भाषा में। जब लॉकडाउन शुरू हुआ तब वह भारत में, गुजरात विद्यापीठ में मुझसे हिंदी पढ़ रही थी। बादमे शेष कक्षाएँ ऑनलाइन समाप्त की गईं। तीसरा वीडियो सिमोन बोलज़ (Simon Bolz) ने जर्मनी से हिंदी और जर्मन भाषा में भेजा था। हिन्दी और अंग्रेजी में मैंने पढ़ा है।

साथियों सभी इस संकट से धीरे-धीरे निकल जाएंगे। हम भारतीय मानते हैं वसुदेव कुटुंबकम में – सारा विश्व एक परिवार है। मुुझे दो दशक से अधिक विदेशी छात्रों को हिंदी पढ़ाते हुए हो गए हैं। आज शिक्षक दिवस पर छोटा सा तोहफा आपको भेंट करती हूँँ। आशा है आप सब को अच्छा लगेगा। मेरी छोटी बेटी सुकन्या संगर ने इस वीडियो को बड़े जतन से बनाया है।

मैंने इस पोस्ट को हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लिखा है ताकी विश्व भर में मेरे सब छात्र और अन्य लोग इसे पढ़ सकें और एक शिक्षक के भाव को समझें इस कविता और वीडियो के माध्यम से।

शिक्षक दिवस की अनंत शुभकामनाएँँ, -डॉ.अंजना संधीर

दर फिर से खुलेंगे

दर फिर से खुलेंगे,
हम फिर से मिलेंगे।

खुल जायेगी बंदिश,
हम पंछी से उड़ेंगे।

फिर घर से निकलेंगे,
दिल के दिए जलेंगे।

हारेगा ये करोना,
मिल कर दुआ करेंगे।

दर फिर से खुलेंगे,
हम फिर से मिलेंगे।


Dear Friends,
Namaskar.
Today the whole world is suffering from Corona. No country has escaped from it. Even though the process of little unlocking  has started, the danger still prevails.

Friends, I am sharing a small video with you in which three of my foreign students are reciting a small Hindi poem written by me – “दर फिर से खुलेंगे”, “Doors Will Open Again”. They were my students at Bhartiya Bhasha Sanskriti Sansthan (Indian Languages and Cultural Center), Gujarat Vidyapith, Ahmedabad.

I had sent this poem to some of my old foreign students while asking them their well being in their countries. They were happy to know that their Indian Hindi teacher has asked about them and their families in this serious situation of Covid-19.

Three of them recited the poem in Hindi as well as in their mother tongue as I asked them to do so if they could do so. Along with the Hindi poem I had sent the English translation that I had done of it. They sent their videos.

Shun Hasebe from Japan sent the Hindi and Japanese video. Beata Naicker from Poland sent her video in Hindi and Polish. Beata was in India when the lockdown started. She was studying in Gujarat Vidyapith and the rest of her course was completed online. The third video was sent by Simon Bolz from Germany in Hindi and German. The Hindi and English version of the poem is recited by me in the video.

Friends, we all hope that slowly all of us will get out of this serious situation. We Indians belive that the whole world is one family – Vasudev Kutumbakam. For me more than two decades have passed while teaching Hindi to foreign students, one decade in U.S.A and the rest in India.

Today is Teacher's Day. I am proud that I am a teacher who builds the human bridges which joins the whole world in a big human chain of brotherhood. My younger daughter Sukanya Sangar has made this video with great efforts. I hope you all will enjoy this little effort of a teacher to join India in this way with other countries by this poem of hope.

I have written this post in Hindi and in English so that all other students of mine as well as people around the world can understand what a teacher thinks through this poem and video.

Happy Teacher's Day, -Dr.Anjana Sandhir

Doors Will Open Again

Doors will open again,
We will meet again.

Lockdown will get open,
Like birds we will fly again.

We'll get out of the house again,
Lamps of the heart will blow.

Corona will be defeated,
We will pray together.

Doors will open again,
We will meet again.