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जख़्म
February 18, 2020 • प्रो. निर्मला देवी • कविताएँ

अभी ना छुना अभी जख्म बहुत ताज़ा है

अभी अभी तो गहरी चोट खाई है

वक़्त पाकर खुद ही भर जायेगा

तब तुम अपने कोमल, प्यार भरे

स्पर्श से सहला देना

लेकिन अभी जख्म बहुत गहरा है

अभी ना छुना जख़्म बहुत ताज़ा है