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कब तलक
February 19, 2020 • प्रो. निर्मला देवी • कविताएँ

कब तलक ज़िन्दगी के इस दामन में

यश वैभव सत्ता के शूलों को

बटोरते रहोगे

कहीं ऐसा ना हो कि शूलों को बटोरते-बटोरते

तुम्हारा ये दामन इतना जर्जर हो जाय

इंसानों के प्यार और प्रभु कृपा के

सुगंधित फूल भी ना ठहर पायें

जिन्दगी के इस जर्जर आँचल में।