ALL संपादकीय पुस्तक कहानी कविताएँ ग़ज़लें लघुकथा लेख पत्रांश साहित्य नंदनी बिरासत
कहानी एक बेल की
September 19, 2020 • अनुवाद: नासिरा शर्मा • पुस्तक

वह दिन जब दुनिया पानी के तूफ़ान से घिर गयी थी, तब नोह ने एक नाव बनायी और उसमें संसार की हर जानदार चीज़ का एक जोड़ा रखकर अपने दो पुत्र व पत्नी सहित उसमें बैठ गया।

जिस दिन तूफ़ान ख़त्म हुआ और नाव किनारे लगी, शैतान आदमी की शक्ल में 'नोह' के सामने आया और बोला, “जो भी चीज़ थी तुम अपने साथ ले आये, पर एक चीज़ लाना भूल गये।"

“क्या चीज़ है जो मैं लाना भूल गया?" नोह ने ताज्जुब से पूछा।

शैतान ने उन्हें एक बेल दिखायी और बोला, “यही वह चीज़ है जो तुम लाना भूल गये हो।"

"हाँ, इसे मैं भूल गया था," यह कहकर नोह ने वह बेल शैतान के हाथ से लेनी चाही।

शैतान बोला, “सिर्फ एक शर्त पर दूंगा कि फल आने तक मैं ही इसकी देखभाल करूंगा।"

आख़िर यह तय किया गया कि पन्द्रह-पन्द्रह दिन बारी-बारी से दोनों उसकी देखभाल करेंगे, जब तक कि बेल में फल न आ जायँ। दोनों ने मिलकर बेल लगा दी।

पाँच दिन बाद शैतान एक मोर लेकर आया। उसकी गर्दन काटकर उसके खून से बेल की सिंचाई की और वापस चला गया। फिर दूसरी बार दसवें दिन जब वह आया तो उसके साथ शेर था। उसका सिर काटकर उसके खून से बेल की सिंचाई कर वापस चला गया। तीसरी बार जब पन्द्रहवें दिन आया तो साथ में एक सुअर लाया और ठीक पहले के दो बार की तरह ही उसकी गर्दन काटकर सिंचाई की और चला गया।

नोह शैतान की इन हरकतों से चकित था। जब उसकी बारी आयी तो उसने शैतान से पूछा, "इन तीन तरह के खून से तुम्हारा मतलब क्या था?"

शैतान ने जवाब दिया, “जो बेल हमने लगायी थी वह इतनी लाभदायक नहीं थी कि इन्सान उससे अधिक-से-अधिक फायदा उठा सकते। अब इसके फल से वो रस निकालेंगे जिसे पीकर वे तीन तरह से मस्त होंगे। इस मस्ती की तीन हालतें होंगी। पहली वह कि जो इसे कम पियेगा, स्वयं को मोर समझेगा और उसी तरह मगन होकर नाचेगा। जो उससे ज़्यादा पियेगा वह शेर की तरह गुर्रायेगा और जंगलीपन की हालत में उतर आयेगा। तीसरी वह कि जो इससे भी ज़्यादा पियेगा वह सूअर की तरह की ' हालत में रहेगा और कुछ भी समझ नहीं पायेगा।"

अनुवाद: नासिरा शर्मा, नई दिल्ली, मो. 9811119489