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कविता
May 1, 2020 • डॉ श्यामबाबू शर्मा • कविताएँ

                                   

स्वतंत्र लेखक, अनुवादक व एकेडमिक काउंसलर (स्नातकोत्तर हिन्दी एवं अनुवाद डिप्लोमा),

इग्नू, शिलांग ( मेघालय), संपर्क सूत्र : 9863531572

 

वैक्सीन

आदमी में हुनर है 

प्लेग की वैक्सीन के ईजाद का 

हैजे के इलाज का 

तपेदिक नजले के इंतकाल का 

मलेरिया की काट का 

वह बचा  सकता है

डेंगी चिकनगुनिया

स्वाइनफ्लू, इबोला 

एचआईवी से 

संक्रमित जान को 

रोक सकता है 

कर्कीय कोशिकाओं के फैलाव को 

तय है वह ईजाद कर लेगा 

इस महामारी का रामबाण 

नेस्तनाबूद हो जायेगा यह 

अदना सा विषाणु 

दिन महीने साल 

शदियां युग कल्प पर कल्प 

बीतते जायेंगे 

कोई बतायेगा 

कब बनेगी वैक्सीन 

छूत-अछूत की 

ऊंच-नीच की 

शहजोर-कमजोर की 

आम-खास की 

महराज-लंबरदार की 

राम-रहीम की 

लैंगिक सोपान की 

बेटी-बहू की 

फर्ज की 

तहजीब की 

पेट के आग की

पलायन की लाचारी की 

जिंदगी जीने की लागत में 

समझौतों के इजाफे की

कब बनेगी वैक्सीन 

दम तोड़ती 

इंसानियत की