ALL संपादकीय पुस्तक कहानी कविताएँ ग़ज़लें लघुकथा लेख पत्रांश साहित्य नंदनी बिरासत
कविता
April 5, 2020 • शिव डोयले • कविताएँ

शिव डोयले
विदिशा (म.प्र.), मो. 9685444352

वसंत आने से


नदी किनारे खड़े
गुलमोहर के तले
छूट गया था
बीता कल

आज चुपके से
लौटा दिया फागुन ने
वैशाखी उत्सव बना
रंगों की खुशी में डूबा
देख रहा हूँ
एड़ी रगड़-रगड़
नहाती धूप

शब्दहीन होकर भी
लहरें लिख रही हैं
उल्लासित गीत
वसंत के आने से

पलाश के 
आंगन में सज रही
फूलों भरी रंगोली