ALL संपादकीय पुस्तक कहानी कविताएँ ग़ज़लें लघुकथा लेख पत्रांश साहित्य नंदनी बिरासत
कोरोना ! तू रुक तो जरा
April 6, 2020 • डॉ सीमा शाहजी
डॉ सीमा शाहजी
मोबाइल नम्बर 7987678511
 
 
कोरोना ! तू रुक तो जरा
 
रात ओ दिन
क्षण प्रतिक्षण
समुद्र नदियां धरती 
ग्रहों को नापता 
कोरोना बनाम /डर की इंतहा
तिलस्म से मानवता को रौंदता
शाप बनकर घूम रहा है 
देश देश की टोह लेकर
संक्रमण /मौत के जखीरे देकर
भारत आया है 
 
उसके आगमन से 
पूरा भामण्डल 
थरथराया है ......
खुश है न तू
तूने सभी को 
झुकाया है 
धैर्य की परीक्षा है तो सही हमारी 
पर.... 
कोरोना ! तू  रुक तो जरा 
अपने आस पास देख 
तेरे विनाशक पंखों को
कुतरने का 
शक्तिपुंज है , 
हर भारतवंशी के पास ...।
तू गिन अब उल्टी सांस
इतिहास गवाह है 
कि
जब जब किसी  संकट ने
भारत मे सर उठाया है
तुलसी गंगाजल के 
पवित्र आचमन 
मन की आस्था 
मानवता दया करुणा 
विश्वास 
ने उसे दूर भगाया है 
ओ ! हन्ता 
भाग भाग 
भारत भूमि से 
नही तो फिर 
सुन ले जरा 
तूने अपनी ही मौत को 
स्वयम बुलाया है .....।