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मौन
October 1, 2020 • डॉ. निर्मल सुन्दर • बिरासत


डॉ. निर्मल सुन्दर, नई दिल्ली, मो. 9910778185

मौन

तुम सदा मौन रहते हो

मौन में छिपी है शक्ति

अपार शान्ति

स्थिरता असीम

कभी भी विचलित नहीं होते

इसी लिये कहलाते हो

ब्रह्माण्ड के नियन्ता।

 

मौन के सम्मुख

शब्द नृत्य करने लगते हैं

अस्त्र-शस्त्र झुक जाते हैं

ज्ञान थरथराने लगता है

अहंकार कोने में

सिमट जाता है।

मौन में होता है संचय शक्ति का

इसे बिखरने नहीं देता यह

इसे पकड़े-पकड़े

उठती है इस से गूंज

जो करती है नाद

और बन जाती है

अनहदनाद

जिसमें छिपे हो तुम

ब्रह्माण्ड के नियन्ता!