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प्यार की मिसाल है हंस पक्षी - लेख
November 18, 2019 • निशा नंदिनी

पक्षियों में श्रेष्ठ हंस को माना जाता है। हिन्दू धर्म में इसे बहुत विवेकी और शांत चित्त पक्षी माना गया है। हंस पक्षी प्यार और पवित्रता का प्रतीक है। कहते हैं कि यह पानी और दूध को अलग करने की क्षमता रखता है। यह विद्या की देवी सरस्वती का वाहन है। इसका मूल निवास स्थान कैलाश मानसरोवर है। ये पक्षी अपना ज्यादातर समय मानसरोवर में रहकर ही बिताते हैं या फिर किसी एकांत झील और समुद्र के किनारे रहते हैं।

यह पक्षी प्यार की मिसाल है। जंगल में रहने वाले अन्य पशु पक्षियों या जंतुओं की तरह यह दूसरा साथी नहीं तलाशता। हंसों के जोड़े में से यदि एक की मौत हो जाए तो दूसरा अपना जीवन अकेले ही बिता देता है। पक्षी विशेषज्ञ भी हंसों के जोड़े पर काफी रिसर्च कर चुके हैं। हंस को पक्षी विज्ञान व धार्मिक दृष्टि से भी श्रेष्ठ माना जाता है।

बॉलीवुड में कितनी ही हिंदी फिल्मों में हंसों को दिखाया गया है। वहीं हंसों के जोड़े पर प्रसिद्ध गाना, 'दो हंसों का जोड़ा' भी फिल्माया जा चुका है। जब कोई व्यक्ति सिद्ध हो जाता है तो उसे कहते हैं कि उसने हंस पद प्राप्त कर लिया और जब कोई समाधिस्थ हो जाता है तो कहते हैं कि वह परमहंस हो गया।

परमहंस सबसे बड़ा पद माना गया है। माना जाता है कि पक्षियों में हंस एक ऐसा पक्षी है जहां देव आत्माएं आश्रय लेती हैं। यह उन आत्माओं का ठिकाना हैं जिन्होंने अपने जीवन में पुण्यकर्म किए हैं और जिन्होंने यम-नियम का पालन किया है। कुछ काल तक हंस योनि में रहकर आत्मा अच्छे समय का इंतजार कर पुनः मनुष्य योनि में लौट आती है या फिर वह देवलोक चली जाती है।

सरस्वती का वाहन हंस पक्षी प्यार और पवित्रता का प्रतीक है। यह बहुत ही विवेकी पक्षी माना गया है। आध्यात्मिक दृष्टि से मनुष्य के निःश्वास में (हं) और श्वास में (स) ध्वनि सुनाई पड़ती है। मनुष्य का जीवन क्रम ही हंस है क्योंकि उसमें ज्ञान का अर्जन संभव है। अतः हंस ज्ञान विवेक, कला की देवी सरस्वती का वाहन है।

यह पक्षी दांप‍त्य जीवन के लिए आदर्श है। यह जीवन भर एक ही साथी के साथ रहते हैं। यदि दोनों में से किसी भी एक साथी की मौत हो जाए तो दूसरा अपना पूरा जीवन अकेले ही गुजार देता है। जंगल के कानून की तरह इनमें मादा पक्षियों के लिए लड़ाई नहीं होती है।

आपसी समझबूझ के बल पर ये अपने साथी का चयन करते हैं। इनमें पारिवारिक और सामाजिक भावनाएं पाई जाती है। सफेद रंग के अलावा काले रंग के हंस ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार हिंदू धर्म में हंस को मारना अर्थात पिता, देवता और गुरु को मारने के समान है। ऐसे व्यक्ति को तीन जन्म तक नर्क में रहना होता है।

हंस पक्षियों में बड़े आकार का पक्षी होता है। यह ज्यादा देर तक और अधिक ऊंचाई पर उड़ नहीं सकता है। हंस लगभग अपना पूरा जीवनकाल पानी में ही बिता देता है। हंस को जलचर पक्षी भी कहते हैं। हंस बहुत ही शर्मीले स्वभाव का होता है। इसलिए यह इंसानों के पास आने पर उनसे दूर भाग जाता है।

हंस अक्सर जोड़े में रहना ही पसंद करता है। यह बहुत ही खूबसूरत पक्षी होता है। दुनिया भर में इसकी 7 से भी अधिक प्रजातियां पाई जाती है। इस पक्षी का निवास स्थान तालाब, नदी नहरों आदि पर होता है। हंस मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार का भोजन कर लेता है।

यह भोजन में ज्यादातर छोटी मछलियां, कीड़े-मकोड़े, फलों के बीज, ईल घास, हरे शैवाल इत्यादि खाता है। भारत देश में हंस सफेद रंग का होता है। अन्य देशों में इसका रंग काला भी होता है। कई क्षेत्रों में इसके पंख काले पाए जाते है तो कहीं पर इसकी गर्दन काली पाई जाती है। काले रंग के हंस ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में पाये जाते हैं।

इनकी चोंच का रंग नारंगी होता है। अन्य देशों में इनकी चोंच का रंग लाल, पीला और काला भी हो सकता है। इनकी गर्दन सुराही की तरह पतली और लंबी होती है। हंस के पंखों का व्यास 3.1 मीटर लंबा हो सकता है।

इनके शरीर के मुकाबले इनकी आंखें और मुंह बहुत छोटे होते हैं। इसकी आंखों का रंग काला होता है। हंस का वजन इनकी विभिन्न प्रजातियों पर निर्भर करता है। इनका अधिकतम वजन 12 किलो तक हो सकता है। हंस का जीवनकाल अधिकतम 10 वर्षों का होता है। इनकी लंबाई 56 से 62 इंच तक हो सकती है। इनके पैर छोटे और झिल्लीदार होते हैं। जिससे यह पानी में अच्छी तरह से तैर पाता है।

हंस को हिंदू धर्म में मां सरस्वती का वाहन माना गया है। यह साल में एक बार 5 से 7 अंडे देता है। इसके अंडे देने का स्थान सरोवर के पास झाड़ियों या घास में होता है। अंडे देने के बाद मादा हंस उन पर तब तक बैठी रहती है। जब तक उनसे बच्चे नहीं निकल आते हैं। हंस के बच्चे औसतन 35 से 40 दिन के अंदर अंडों से बाहर निकल आते है।

स्वान या हंस के बच्चे को सिग्नेट कहा जाता है हंस के बच्चे का जन्म होने की 6 महीने तक वह अपनी मां के साथ ही रहता है।

अंडों पर बैठी मादा हंस को भोजन नर हंस द्वारा करवाया जाता है। हंस मुख्य रूप से भारत अमेरिका ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड कनाडा और अलास्का में पाया जाता है। हंस एक ऐसा पक्षी है जो कि पानी पर तैरते समय भी सो सकता है।

हंस एक रक्षात्मक और सभ्य पक्षी है। यह आमतौर पर किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन जब कोई इसके घोंसले के पास या इस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो यह उस पक्षी या इंसान के पीछे भाग सकता है और उसे काट भी सकता है। इसके बाद यह कुछ समय तक चिड़चिड़ा भी रह सकता है।

हंस के मुंह में दांत नहीं होते हैं। इसलिए इस के काटने पर अधिक दर्द महसूस नहीं होता है लेकिन त्वचा में जलन जरूर महसूस होती है। यह बहुत खूबसूरत पक्षी होता है इसके पंख मखमल के कपड़े के जैसे कोमल होते हैं।

इस तरह अगर यह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी कि सरस्वती मां के वाहन हंस पक्षी में अपने नाम के अनुरूप ही गुण पाये जाते हैं।