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March 1, 2020 • रश्मि रमानी • कविताएँ

अठारह बरस की एक लड़की चैंक पड़ी है

हैरानी-सी ढूँढती है वह उस गन्ध को

जिसकी गाँठ खुल गई है

उसके भीतर....

दूर आसमान में ताकते

अचानक वह मुस्कुरा देती है

शायद!

कोई नाम याद आ गया है

एक मीठा दर्द

पूरे जिस्म में लहर बनकर फैल रहा है

साज़ के सारे तार

झनझना दिए हैं

भरपूर-सी एक अंगड़ाई ने

लड़की

दाँतों से काटती है होंठ

कुतरती है अपने नाख़ून

भरती है ठंडी साँस

और सोचती है

रात की अनन्त इच्छाओं

और, सपनों की दूरी के बारे में।