ALL संपादकीय पुस्तक कहानी कविताएँ ग़ज़लें लघुकथा लेख पत्रांश साहित्य नंदनी बिरासत
तुम्हारा वतन - मेरा वतन
October 6, 2020 • रश्मि रमानी • कविताएँ

रश्मि रमानी, 30 पलसीकर कालोनी मानस मेंशन फ्लैट नंबर 201 जूनी इंदौर थाने के सामने इंदौर 452004
मो. 9827261567

ख़ून का रंग तो एक जैसा था
जाति और ज़मीन भी समान ही थी
सियासी चालबाज़ों का
एक बेतुका फैसला था बँटवारा
ख़ून सफेद हो गया
जात फिर गयी
ज़मीन बदल गयी।

वह वतन
जितना मेरा था
उतना ही तुम्हारा भी
आज
हमारा देश अलग है
क़ौमी तराना और परचम अलग है।

आसमान तो आज़ाद है
पर
धरती की सतह पर बंदिश
काँटेदार तारें
ताला लगा फाटक
लोहे का मज़बूत अहाता है
दोनों तरफ़ तैनात फ़ौजी
सरहद की रक्षा करते हैं
संस्कृति की हिफ़ाजत नहीं
हमारी तहज़ीब और समान विरसा
जो एक जैसा मिला-जुला था
आज बँटा हुआ है।

अब
जब हम मिलेंगे
हाथों में
प्यार भरे उपहार
आँखों में आँसू
जेब में पासपोर्ट - वीज़ा होंगे
हमारा स्वागत - सत्कार
जलावतनी करेगी।