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उल्टा-पुल्टा
November 15, 2020 • रमेश दवे • बिरासत

रमेश दवे, भोपाल, मो. 9406523071

 

रोना मत

नारों का ज़माना है,

मानो मत कोई मत

तम का जमाना है,

करो मत कोई नाटक

काटना पड़ता है

खुद को ही,

पीटो मत पुरानी लकीरें

टोपी बदल गई है

सिर में,

चलो लोच के साथ

डरो पर चलते चलते

मरो इस तरह

कि

रोम रोम जी उठे !